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1.167.3
मि॒म्यक्ष॒ येषु॒ सुधि॑ता घृ॒ताची॒ हिर॑ण्यनिर्णि॒गुप॑रा॒ न ऋ॒ष्टिः । गुहा॒ चर॑न्ती॒ मनु॑षो॒ न योषा॑ स॒भाव॑ती विद॒थ्ये॑व॒ सं वाक् ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 1.167.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
भली प्रकार स्थित, जल बरसाती हुई एवं सुनहरे रंग की बिजली मरुतों के साथ मेघमाला, छिपे हुए स्थान में रहने वाली राजपुरुष की पत्नी अथवा यज्ञीय वाणी के समान रहती है. (३)
EN English Translation
Well-situated, water-rained and golden-colored electricity remains like a cloud with maruts, the wife of a prince living in a hidden place or a sacrificial voice. (3)