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1.170.2
किं न॑ इन्द्र जिघांससि॒ भ्रात॑रो म॒रुत॒स्तव॑ । तेभिः॑ कल्पस्व साधु॒या मा नः॑ स॒मर॑णे वधीः ॥ (२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 1.170.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अगस्त्य बोले-“हे इंद्र! तुम वया मुझे मारना चाहते हो? अपने भ्राता मरुतों के साथ जाकर भली प्रकार यज्ञ के भागों का भोग करो. संग्राम में हमारी हत्या मत करना.” (२)
EN English Translation
Agastya said, "O Indra! Do you want to kill me? Go with your brotherly maruts and enjoy the parts of the yajna well. Don't kill us in the war." (2)