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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 183 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 183 • ऋचा / मन्त्र 6

1.183.6

Mantra ID: 1.183.6

अता॑रिष्म॒ तम॑सस्पा॒रम॒स्य प्रति॑ वां॒ स्तोमो॑ अश्विनावधायि । एह या॑तं प॒थिभि॑र्देव॒यानै॑र्वि॒द्यामे॒षं वृ॒जनं॑ जी॒रदा॑नुम् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.183.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! हम तुम्हारे कारण अंधकार से पार हो जाएंगे. यह स्तोत्र तुम्हारे लिए ही बनाया गया है. यज्ञरूपी देवमार्ग पर आ जाओ, जिससे हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करें. (६)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! We will overcome the darkness because of you. This psalm is designed for you only. Come to the path of the sacrificial god, so that we may gain food, strength and long life. (6)

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