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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 2 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 2 • ऋचा / मन्त्र 3

1.2.3

Mantra ID: 1.2.3

वायो॒ तव॑ प्रपृञ्च॒ती धेना॑ जिगाति दा॒शुषे॑ । उ॒रू॒ची सोम॑पीतये ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.2.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वायु! तुम सोमरस की प्रशंसा करते हुए उसे पीने की जो बात कहते हो, वह बहुत से यजमानों के पास तक जाती है. (३)

EN English Translation

O Yaayu! The thing you say about drinking someras while praising it, goes to many hosts. (3)

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