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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 37 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 37 • ऋचा / मन्त्र 5

1.37.5

Mantra ID: 1.37.5

प्र शं॑सा॒ गोष्वघ्न्यं॑ क्री॒ळं यच्छर्धो॒ मारु॑तम् । जम्भे॒ रस॑स्य वावृधे ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.37.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋत्विजो! दूध देने वाली गायों के बीच स्थित मरुद्गाणों के अविनाशी, विहारशील एवं सहन करने योग्य तेज की प्रशंसा करो. वह तेज गाय का दूध पीने के कारण बढ़ा है. (५)

EN English Translation

Hey Ritvijo! Praise the indestructible, incorrigible and bearable brightness of the marudganas located among the milking cows. He grew up due to drinking fast cow's milk. (5)

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