Popular:
ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 46 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 46 • ऋचा / मन्त्र 12

1.46.12

Mantra ID: 1.46.12

तत्त॒दिद॒श्विनो॒रवो॑ जरि॒ता प्रति॑ भूषति । मदे॒ सोम॑स्य॒ पिप्र॑तोः ॥ (१२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 1.46.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्तोतागण प्रसन्नता के लिए सोमपान करने वाले अश्चिनीकुमारों द्वारा की गई अपनी रक्षा की बार-बार प्रशंसा करते हैं. (१२)

EN English Translation

The Stotagans repeatedly praise their defences by the Ashchinikumaras who perform sompan for pleasure. (12)

卐 HinduText AI