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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 46 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 46 • ऋचा / मन्त्र 14

1.46.14

Mantra ID: 1.46.14

यु॒वोरु॒षा अनु॒ श्रियं॒ परि॑ज्मनोरु॒पाच॑रत् । ऋ॒ता व॑नथो अ॒क्तुभिः॑ ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.46.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे चारों ओर गमनशील अश्चिनीकुमारो! तुम्हारे आगमन की शोभा का अनुसरण करती हुई उषा आवे. तुम दोनों निशा में संपादित यज्ञ का हवि ग्रहण करो. (१४)

EN English Translation

O ashchinikumaro moving around! Follow the splendour of your arrival. Both of you accept the yajna edited in Nisha. (14)

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