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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 94 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 94 • ऋचा / मन्त्र 12

1.94.12

Mantra ID: 1.94.12

अ॒यं मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्य॒ धाय॑सेऽवया॒तां म॒रुतां॒ हेळो॒ अद्भु॑तः । मृ॒ळा सु नो॒ भूत्वे॑षां॒ मनः॒ पुन॒रग्ने॑ स॒ख्ये मा रि॑षामा व॒यं तव॑ ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.94.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि के स्तोता को मित्र और वरुण धारण करें. अंतरिक्ष में वर्तमान मरुतों का क्रोध महान्‌ होता है. हे अग्नि! हमारी रक्षा करो. इन मरुतों का मन हमारे प्रति प्रसन्न हो. हे अग्नि! तुम्हारी मित्रता प्राप्त करके हम किसी के द्वारा हिंसित न हों. (१२)

EN English Translation

Wear the hymn of agni as a friend and varuna. The anger of the present-day maruts in space is great. O agni! Protect us. The minds of these maruts be pleased with us. O agni! Let us not be disenchanted by anyone by gaining your friendship. (12)

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