Popular:
ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 94 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 94 • ऋचा / मन्त्र 15

1.94.15

Mantra ID: 1.94.15

यस्मै॒ त्वं सु॑द्रविणो॒ ददा॑शोऽनागा॒स्त्वम॑दिते स॒र्वता॑ता । यं भ॒द्रेण॒ शव॑सा चो॒दया॑सि प्र॒जाव॑ता॒ राध॑सा॒ ते स्या॑म ॥ (१५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 1.94.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शोभनधनसंपन्न एवं अखंडनीय अग्नि! समस्त यज्ञों में वर्तमान जिस यजमान को तुम पाप से रहित करके कल्याणकारी बल से युक्त करते हो, वह समृद्ध होता है. तुम्हारी स्तुति करने वाले हम पुत्र-पौत्रादि वाले धन से युक्त हों. (१५)

EN English Translation

O glorious and inimitable agni! In all the yagnas, the present host which you make free from sin and equipped with the force of welfare, prospers. Let us, who praise you, have the wealth of the sons and grandsons. (15)

卐 HinduText AI