Popular:
ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 94 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 94 • ऋचा / मन्त्र 5

1.94.5

Mantra ID: 1.94.5

वि॒शां गो॒पा अ॑स्य चरन्ति ज॒न्तवो॑ द्वि॒पच्च॒ यदु॒त चतु॑ष्पद॒क्तुभिः॑ । चि॒त्रः प्र॑के॒त उ॒षसो॑ म॒हाँ अ॒स्यग्ने॑ स॒ख्ये मा रि॑षामा व॒यं तव॑ ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 1.94.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इसकी किरणें समस्त प्राणियों की रक्षा करती हुई विचरण करती हैं. दो पैरों और चार पैरों वाले जंतु इसकी किरणों से युक्त हो जाते हैं. हे अग्नि, तुम विचित्र दीप्तिसंपन्न, सबका ज्ञान कराने वाले एवं उषा से भी महान्‌ हो. तुम्हारी मित्रता प्राप्त करके हम किसी के द्वारा हिंसित न हों. (५)

EN English Translation

Its rays move around protecting all beings. The two-legged and four-legged animals become equipped with its rays. O agni, you are a strange, brilliant, enlightened all, and greater than Usha. Let us not be disenchanted by anyone by gaining your friendship. (5)

卐 HinduText AI