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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 104 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 104 • ऋचा / मन्त्र 1

10.104.1

Mantra ID: 10.104.1

असा॑वि॒ सोमः॑ पुरुहूत॒ तुभ्यं॒ हरि॑भ्यां य॒ज्ञमुप॑ याहि॒ तूय॑म् । तुभ्यं॒ गिरो॒ विप्र॑वीरा इया॒ना द॑धन्वि॒र इ॑न्द्र॒ पिबा॑ सु॒तस्य॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.104.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! तुम्हारे लिए सोमरस निचोड़ा गया है. तुम अपने घोड़ों द्वारा जल्दी यज्ञ में आओ. श्रेष्ठ ब्राह्मणों ने स्तुतियां करते हुए तुम्हारे लिए यह सोमरस दिया है. तुम इसे पिओ. (१)

EN English Translation

O Indra called by many! For you the somras has been squeezed. You come to the yagna quickly by your horses. The best Brahmins have given this somras for you while praising you. You drink it. (1)

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