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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 105 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 105 • ऋचा / मन्त्र 11

10.105.11

Mantra ID: 10.105.11

श॒तं वा॒ यद॑सुर्य॒ प्रति॑ त्वा सुमि॒त्र इ॒त्थास्तौ॑द्दुर्मि॒त्र इ॒त्थास्तौ॑त् । आवो॒ यद्द॑स्यु॒हत्ये॑ कुत्सपु॒त्रं प्रावो॒ यद्द॑स्यु॒हत्ये॑ कुत्सव॒त्सम् ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.105.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शक्तिशाली इंद्र! सुमित्र ने तुम्हारे निमित्त इस प्रकार की सौ स्तुतियां बनाई तथा दुर्मित्र ने भी सौ स्तुतियां बनाई. तुमने दस्युहत्या के समय कुत्स के पुत्र की रक्षा की थी. (११)

EN English Translation

O mighty Indra! Sumitra made a hundred such eulogies for you and Durmitra also made a hundred praises. You protected the son of Kuts at the time of banditization. (11)

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