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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 106 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 106 • ऋचा / मन्त्र 7

10.106.7

Mantra ID: 10.106.7

प॒ज्रेव॒ चर्च॑रं॒ जारं॑ म॒रायु॒ क्षद्मे॒वार्थे॑षु तर्तरीथ उग्रा । ऋ॒भू नाप॑त्खरम॒ज्रा ख॒रज्रु॑र्वा॒युर्न प॑र्फरत्क्षयद्रयी॒णाम् ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.106.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शक्तिशाली अश्विनीकुमारो! तुम वीर पुरुषों के समान मेरे घूमने वाले वृद्धावस्था से युक्त एवं मरणशील शरीर को विपत्तियों से उसी प्रकार पार करके अनुकूल स्थिति में पहुंचाओ, जिस प्रकार जल नीचे स्थान की ओर बहता है. तुम्हें ऋभु के समान शीघ्रगामी रथ मिला है. वायु के समान तेज चलने वाला तुम्हारा रथ उड़कर शत्रुओं का धन छीन लाया है. (७)

EN English Translation

O mighty Ashwinikumaro! Like you brave men, cross my wandering old-age and dying body with adversities to a favorable position in the same way as the water flows down to the place below. You have got a quick chariot like Ribhu. Your chariot, which runs as fast as the wind, has blown away the wealth of the enemies. (7)

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