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10.108.1
किमि॒च्छन्ती॑ स॒रमा॒ प्रेदमा॑नड्दू॒रे ह्यध्वा॒ जगु॑रिः परा॒चैः । कास्मेहि॑तिः॒ का परि॑तक्म्यासीत्क॒थं र॒साया॑ अतरः॒ पयां॑सि ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.108.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
पणि बोले-“हे सरमा! तुम क्या अभिलाषा करती हुई यहां आई हो? इधर यह मार्ग बहुत दूर का एवं चक्कर वाला है, इस पर चलना कठिन है. हमारे पास ऐसी कौन सी वस्तु है, जिसके लिए तुम आई हो? तुम्हें आने में कितनी रातें लगीं और तुमने नदी कैसे पार की?” (१)
EN English Translation
Pani said, "Hey Sarma! What have you come here wishing for? Here this path is very far and round, it is difficult to walk on it. What kind of thing do we have that you have come for? How many nights did it take you to come and how did you cross the river?" (1)