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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 108 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 108 • ऋचा / मन्त्र 8

10.108.8

Mantra ID: 10.108.8

एह ग॑म॒न्नृष॑यः॒ सोम॑शिता अ॒यास्यो॒ अङ्गि॑रसो॒ नव॑ग्वाः । त ए॒तमू॒र्वं वि भ॑जन्त॒ गोना॒मथै॒तद्वचः॑ प॒णयो॒ वम॒न्नित् ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.108.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सरमा बोली-“सोमपान करके मतवाले अंगिरागोत्रीय अयास्य ऋषि एवं नवगु ऋषियों का समूह यहां आएगा. वे इस गोधन का विभाग करके ले जावेंगे. उस समय तुमको यह अभिमान भरा वचन छोड़ना पड़ेगा.” (८)

EN English Translation

Sarma said, "A group of Angiragotriya Ayasya Rishis and Navgu rishis will come here. They will take this godhan to the department. At that time you have to give up this proud promise." (8)

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