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10.12.6
दु॒र्मन्त्वत्रा॒मृत॑स्य॒ नाम॒ सल॑क्ष्मा॒ यद्विषु॑रूपा॒ भवा॑ति । य॒मस्य॒ यो म॒नव॑ते सु॒मन्त्वग्ने॒ तमृ॑ष्व पा॒ह्यप्र॑युच्छन् ॥ (६)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.12.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मरणरहित सूर्य का अपराधरहित एवं मधुरतायुक्त जल धरती पर नानारूप धारण करता है. यम के अपराध को सूर्य जानते हैं. हे महान् अग्नि! प्रमाद न करते हुए सूर्य की रक्षा करो. (६)
EN English Translation
The guiltless and sweet water of the deadly sun takes on the earth. The sun knows yama's guilt. O great agni! Protect the sun without praying. (6)