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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 128 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 128 • ऋचा / मन्त्र 5

10.128.5

Mantra ID: 10.128.5

देवीः॑ षळुर्वीरु॒रु नः॑ कृणोत॒ विश्वे॑ देवास इ॒ह वी॑रयध्वम् । मा हा॑स्महि प्र॒जया॒ मा त॒नूभि॒र्मा र॑धाम द्विष॒ते सो॑म राजन् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.128.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

छः विशाल देवियां मेरी उन्नति करें. हे सब देवो! मेरे यज्ञ में वीरता का कार्य करो. मैं शरीर और प्रजा संबंधी कोई हानि न उठाउं. हे राजा सोम! हम शत्रु के सामने न हारें. (५)

EN English Translation

Six giant ladies make me progress. Oh, all gods! Do the act of valour in my yajna. I do not suffer any harm related to the body and the people. O King Mon! Let's not lose in front of the enemy. (5)

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