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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 13 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 13 • ऋचा / मन्त्र 5

10.13.5

Mantra ID: 10.13.5

स॒प्त क्ष॑रन्ति॒ शिश॑वे म॒रुत्व॑ते पि॒त्रे पु॒त्रासो॒ अप्य॑वीवतन्नृ॒तम् । उ॒भे इद॑स्यो॒भय॑स्य राजत उ॒भे य॑तेते उ॒भय॑स्य पुष्यतः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.13.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्तोतागण पिता के समान एवं प्रशंसायोग्य सोम के लिए सातों छंदों वाली स्तुतियां बोलते हैं. सोम के पुत्र तुल्य ऋत्विज्‌ भी सच्ची स्तुतियां बोलते हैं. हवि ढोने वाली दोनों गाड़ियां देव और मानव दोनों की ईश हैं, यज्ञकर्म पूरा करने का प्रयत्न करती हैं तथा दोनों का पोषण करती हैं. (५)

EN English Translation

The Psalms speak praises with seven verses for the father-like and praiseworthy Soma. The son of Som also speaks true praises. Both the vehicles carrying the havi are the gods of both god and man, try to complete the yajnakarma and nourish both. (5)

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