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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 139 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 139 • ऋचा / मन्त्र 3

10.139.3

Mantra ID: 10.139.3

रा॒यो बु॒ध्नः सं॒गम॑नो॒ वसू॑नां॒ विश्वा॑ रू॒पाभि च॑ष्टे॒ शची॑भिः । दे॒व इ॑व सवि॒ता स॒त्यध॒र्मेन्द्रो॒ न त॑स्थौ सम॒रे धना॑नाम् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.139.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

धनों के मूल व संपत्तियों के संगम सविता अपनी शक्ति से सभी पदार्थो को प्रकाशित करते हैं. सविता दिव्यगुणयुक्त देव के समान सत्यधर्मा हैं एवं धन संबंधी युद्ध में स्थित रहते हैं. (३)

EN English Translation

The confluence of wealth and properties, Savita illuminates all the substances with her power. Savita is a true religion like the divine god and is in a war of money. (3)

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