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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 140 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 140 • ऋचा / मन्त्र 3

10.140.3

Mantra ID: 10.140.3

ऊर्जो॑ नपाज्जातवेदः सुश॒स्तिभि॒र्मन्द॑स्व धी॒तिभि॑र्हि॒तः । त्वे इषः॒ सं द॑धु॒र्भूरि॑वर्पसश्चि॒त्रोत॑यो वा॒मजा॑ताः ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.140.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे बल के पुत्र, सबके जानने वाले एवं स्तुतियों के साथ स्थापित अग्नि! तुम हमारे यज्ञकर्मो से प्रसन्न बनो. तुम्हारे ऊपर अनेक रूपों वाले एवं विचित्र तृप्ति वाले सब अन्न रखे हुए हैं. (३)

EN English Translation

O son of strength, the agni set with all the knowers and the praises! Be pleased with our yajnakarmas. You have all the food with many forms and strange satiety on you. (3)

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