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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 144 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 144 • ऋचा / मन्त्र 3

10.144.3

Mantra ID: 10.144.3

घृषुः॑ श्ये॒नाय॒ कृत्व॑न आ॒सु स्वासु॒ वंस॑गः । अव॑ दीधेदही॒शुवः॑ ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.144.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

दीप्तिशाली इंद्र अपनी प्रजाओं में शोभन रूप से चलते हैं एवं मुझ श्येन ऋषि का वंश उन्होंने बढ़ाया है. (३)

EN English Translation

The bright indra walks gracefully in his people and has extended the lineage of my sage Sheen. (3)

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