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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 145 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 145 • ऋचा / मन्त्र 6

10.145.6

Mantra ID: 10.145.6

उप॑ तेऽधां॒ सह॑मानाम॒भि त्वा॑धां॒ सही॑यसा । मामनु॒ प्र ते॒ मनो॑ व॒त्सं गौरि॑व धावतु प॒था वारि॑व धावतु ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.145.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पति! मैंने तुम्हारे तकिए के सहारे इस शक्तिशालिनी ओषधि को तुम्हारे सिरहाने रख दिया है. जिस प्रकार गाय दौड़कर बछड़े के पास चली जाती है और पानी नीचे की ओर चलता है, उसी प्रकार तुम्हारा मन मेरे समीप आवे. (६)

EN English Translation

Oh, husband! I have put this powerful herb with the help of your pillow in your head. Just as the cow runs to the calf and the water moves downwards, so let your mind come near to me. (6)

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