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10.15.11
अग्नि॑ष्वात्ताः पितर॒ एह ग॑च्छत॒ सदः॑सदः सदत सुप्रणीतयः । अ॒त्ता ह॒वींषि॒ प्रय॑तानि ब॒र्हिष्यथा॑ र॒यिं सर्व॑वीरं दधातन ॥ (११)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.15.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्निष्वात्त नामक पितरो! यहां आओ और स्वागत स्वीकार करके अपने-अपने आसनों पर बैठो एवं कुशों पर फैले हुए हव्यों को खाओ. इसके बाद हमें पुत्र-पौत्रों से युक्त धन दो. (११)
EN English Translation
O pitro, called Agnishwat! Come here and accept the welcome, sit on your own asanas and eat the havyas spread over the kushas. After that, give us money with sons and grandsons. (11)