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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 160 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 160 • ऋचा / मन्त्र 5

10.160.5

Mantra ID: 10.160.5

अ॒श्वा॒यन्तो॑ ग॒व्यन्तो॑ वा॒जय॑न्तो॒ हवा॑महे॒ त्वोप॑गन्त॒वा उ॑ । आ॒भूष॑न्तस्ते सुम॒तौ नवा॑यां व॒यमि॑न्द्र त्वा शु॒नं हु॑वेम ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.160.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम घोड़े, गायों एवं अन्न की अभिलाषा से तुम्हारे आगमन की प्रार्थना करते हैं हम तुम्हें सुखदाता जानते हैं, इसलिए यह नवीन स्तोत्र बनाकर तुम्हें बुलाते हैं. (५)

EN English Translation

O Indra! We pray for your arrival with the desire of horses, cows and food, we know you to be the giver of happiness, so we call you by making this new hymn. (5)

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