Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 18 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 14

10.18.14

Mantra ID: 10.18.14

प्र॒ती॒चीने॒ मामह॒नीष्वाः॑ प॒र्णमि॒वा द॑धुः । प्र॒तीचीं॑ जग्रभा॒ वाच॒मश्वं॑ रश॒नया॑ यथा ॥ (१४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.18.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रजापति! जिस प्रकार बाण के पिछले भाग में पंख लगाये जाते हैं, उसी प्रकार मुझ संकुसुक ऋषि को देवों ने संवत्सर के पूज्य दिन के रूप में रखा है. घोड़ों को जिस प्रकार लगाम के सहारे रोका जाता है, उसी प्रकार तुम मेरी पूज्य स्तुति को स्वीकार करो. (१४)

EN English Translation

O Prajapati! Just as the wings are applied to the back of the arrow, so the sage Sankusuk has been kept by the Devas as the revered day of Samvatsar. Just as horses are stopped with a rein, so accept My revered praise. (14)

卐 HinduText AI