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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 18 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 5

10.18.5

Mantra ID: 10.18.5

यथाहा॑न्यनुपू॒र्वं भव॑न्ति॒ यथ॑ ऋ॒तव॑ ऋ॒तुभि॒र्यन्ति॑ सा॒धु । यथा॒ न पूर्व॒मप॑रो॒ जहा॑त्ये॒वा धा॑त॒रायूं॑षि कल्पयैषाम् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.18.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धाता! जिस प्रकार दिन पर दिन बीतते हैं एवं ऋतुएं ऋलुओं के पश्चात्‌ ठीक से जाती हैं, उसी प्रकार पहले पैदा हुए पिता आदि के सामने बाद में उत्पन्न हुए पुत्र आदि नहीं मरते हैं. हमारे परिवारों की आयु इसी प्रकार स्थिर रखो. (५)

EN English Translation

O dhata! Just as day by day and the seasons go well after the rilus, so the sons born later in front of the father, etc., who were born earlier, do not die. Keep the age of our families stable in the same way. (5)

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