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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 25 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 25 • ऋचा / मन्त्र 10

10.25.10

Mantra ID: 10.25.10

अ॒यं घ॒ स तु॒रो मद॒ इन्द्र॑स्य वर्धत प्रि॒यः । अ॒यं क॒क्षीव॑तो म॒हो वि वो॒ मदे॑ म॒तिं विप्र॑स्य वर्धय॒द्विव॑क्षसे ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.25.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम शीघ्र काम करने वाले, नशीले एवं इंद्र को तृप्ति देने वाले हैं. वे हमारी बुद्धि को बढ़ावें. सोम ने महान्‌ मेधावी कक्षीवान्‌ ऋषि की बुद्धि को बढ़ाया था. वे विशेष मद के कारण महान्‌ हैं. (१०)

EN English Translation

Som is a quick worker, a drug addict and a satiating agent to Indra. They increase our intelligence. Som had enhanced the wisdom of the great meritorious Kandhivan rishi. They are great because of the particular item. (10)

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