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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 27 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 27 • ऋचा / मन्त्र 5

10.27.5

Mantra ID: 10.27.5

न वा उ॒ मां वृ॒जने॑ वारयन्ते॒ न पर्व॑तासो॒ यद॒हं म॑न॒स्ये । मम॑ स्व॒नात्कृ॑धु॒कर्णो॑ भयात ए॒वेदनु॒ द्यून्कि॒रणः॒ समे॑जात् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.27.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

“मुझे युद्ध में कोई रोक नहीं पाता. यदि मैं मन में कोई निश्चय करूं तो पर्वत भी उसका विरोध नहीं कर सकते. मेरे गर्जन से बहरा भी डर जाता है. सूर्य भी प्रतिदिन मेरे भय से कांपते हैं.” (५)

EN English Translation

"There's nothing stopping me in the war. If I make a decision in my mind, even the mountains cannot resist it. The deaf too gets scared by my roar. The sun trembles every day with my fear." (5)

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