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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 30 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 11

10.30.11

Mantra ID: 10.30.11

हि॒नोता॑ नो अध्व॒रं दे॑वय॒ज्या हि॒नोत॒ ब्रह्म॑ स॒नये॒ धना॑नाम् । ऋ॒तस्य॒ योगे॒ वि ष्य॑ध्व॒मूधः॑ श्रुष्टी॒वरी॑र्भूतना॒स्मभ्य॑मापः ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.30.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋत्विजो! देवपूजा के लिए हमारे यज्ञ को प्रेरित करो, धनप्राप्ति के लिए हमारे पास स्तुतियां भेजो एवं यज्ञ के अवसर पर हमारे लिए सोमरस से भरा हुआ चर्मपात्र खोलो. हे ऋत्विजों द्वारा छोड़े जाते हुए जल! तुम हमारे लिए सुखकर बनो. (११)

EN English Translation

Hey Ritvijo! Inspire our yajna for devpuja, send us praises for the sake of wealth and on the occasion of the yajna, open for us a skin vessel full of somras. O water being released by the Ritvites! Be happy for us. (11)

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