Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
10.31.11
उ॒त कण्वं॑ नृ॒षदः॑ पु॒त्रमा॑हुरु॒त श्या॒वो धन॒माद॑त्त वा॒जी । प्र कृ॒ष्णाय॒ रुश॑दपिन्व॒तोध॑रृ॒तमत्र॒ नकि॑रस्मा अपीपेत् ॥ (११)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 10.31.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
वेदवाही लोग कण्व को नृषद का पुत्र कहते हैं. काले रंग वाले एवं हव्यान्न धारक कण्व ने धन प्राप्त किया. अग्नि ने कण्व के लिए अपना शोभनरूप प्रकट किया. कण्व के अतिरिक्त अग्नि के लिए वैसा यज्ञ कोई नहीं कर सकता. (११)
EN English Translation
Vedavahis call Kanva the son of Nrishad. Kanva, a black-colored and white holder, received money. Agni revealed its appearance for Kanva. No one can perform such a yajna for agni other than Kanva. (11)