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10.31.9
स्ते॒गो न क्षामत्ये॑ति पृ॒थ्वीं मिहं॒ न वातो॒ वि ह॑ वाति॒ भूम॑ । मि॒त्रो यत्र॒ वरु॑णो अ॒ज्यमा॑नो॒ऽग्निर्वने॒ न व्यसृ॑ष्ट॒ शोक॑म् ॥ (९)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.31.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
रश्मिसमूह वाले सूर्य विस्तृत धरती का अतिक्रमण करके नहीं जाते और वायु भी समर्थ होते हुए वर्षा को छिन्न-भिन्न नहीं करते. मित्र एवं वरुण प्रकट होकर इस प्रकार प्रकाश करते हैं, जिस प्रकार अग्नि वन को प्रकाशित कर सकते हैं. (९)
EN English Translation
The rays of the sun do not cross the vast earth and the wind also does not disperse the rain while being able to. Friends and Varuna appear and light up in such a way that they can illuminate the agni forest. (9)