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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 40 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 40 • ऋचा / मन्त्र 1

10.40.1

Mantra ID: 10.40.1

रथं॒ यान्तं॒ कुह॒ को ह॑ वां नरा॒ प्रति॑ द्यु॒मन्तं॑ सुवि॒ताय॑ भूषति । प्रा॒त॒र्यावा॑णं वि॒भ्वं॑ वि॒शेवि॑शे॒ वस्तो॑र्वस्तो॒र्वह॑मानं धि॒या शमि॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.40.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यज्ञों के नेता अश्चिनीकुमारो! तुम्हारे दीप्तिशाली यज्ञ की ओर प्रातःकाल चलने वाले, व्याप्त, सब मनुष्यों के पास प्रतिदिन धन पहुंचाने वाले एवं गतिशील रथ की पूजा मेरे समान किस यजमान ने कहां की है? (१)

EN English Translation

O Aschinikumaro, the leader of the yagnas! Where has any host worshipped the chariot, which walks in the morning towards your glorious yagna, which pervades, brings money to all men every day and is moving, like me? (1)

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