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10.40.4
यु॒वां मृ॒गेव॑ वार॒णा मृ॑ग॒ण्यवो॑ दो॒षा वस्तो॑र्ह॒विषा॒ नि ह्व॑यामहे । यु॒वं होत्रा॑मृतु॒था जुह्व॑ते न॒रेषं॒ जना॑य वहथः शुभस्पती ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.40.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे वरण करने वाले अश्विनीकुमारो! बहेलिए जिस प्रकार शार्दूल की इच्छा करते हैं, उसी प्रकार हव्य लेकर मैं तुम्हें रात-दिन बुलाता हूं. हे यज्ञ के नेता अश्विनीकुमारो! यजमान समय- समय पर तुम्हारे लिए आहुति देते हैं. तुम वर्षा के जल के स्वामी होने के कारण यजमानों के लिए अन्न देते हो. (४)
EN English Translation
O ashvinikumaro who chooses! Just as you wish shardul, so i call you day and night with a havya. O leader of the yajna, Ashwinikumaro! Hosts offer sacrifices for you from time to time. You, being the lord of rain water, give food to the hosts. (4)