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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 53 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 6

10.53.6

Mantra ID: 10.53.6

तन्तुं॑ त॒न्वन्रज॑सो भा॒नुमन्वि॑हि॒ ज्योति॑ष्मतः प॒थो र॑क्ष धि॒या कृ॒तान् । अ॒नु॒ल्ब॒णं व॑यत॒ जोगु॑वा॒मपो॒ मनु॑र्भव ज॒नया॒ दैव्यं॒ जन॑म् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.53.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम यज्ञ का विस्तार करते हुए लोकभासक सूर्य का अनुगमन करो तथा उन ज्योतिपूर्ण मार्गो की रक्षा करो, जिन्हें यज्ञकर्म द्वारा प्राप्त किया जाता है. अग्नि स्तोताओं का कार्य दोषरहित बनावें. हे अग्नि! तुम स्तुतियोग्य बनो और देवसमूह को यज्ञाभिमुख बनाओ. (६)

EN English Translation

O agni! You should follow the sun of the folk while extending the yajna and protect the glorious paths which are attained by yajnakarma. Make the work of agni stoetas flawless. O agni! Be praiseworthy and make the godly group yajna-oriented. (6)

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