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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 53 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 9

10.53.9

Mantra ID: 10.53.9

त्वष्टा॑ मा॒या वे॑द॒पसा॑म॒पस्त॑मो॒ बिभ्र॒त्पात्रा॑ देव॒पाना॑नि॒ शंत॑मा । शिशी॑ते नू॒नं प॑र॒शुं स्वा॑य॒सं येन॑ वृ॒श्चादेत॑शो॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑ ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.53.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

त्वष्टा पात्र बनाना जानते हैं. अतिशय शोभन कर्म वाले त्वष्टा देवों के पानकर्म में प्रयुक्त सोमपात्रों को धारण करते हैं. वे उत्तम लोहे से बने हुए कुठार को तेज करते हैं. ब्रह्मणस्पति त्वष्टा उसी कुठार से लकड़ी काटते हैं. (९)

EN English Translation

Know how to make a skin container. The rituals with extreme adornments hold the somapatras used in the pan-karma of the gods. They sharpen the axes made of the perfect iron. Brahmanaspati Tavastha cuts wood from the same axe. (9)

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