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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 55 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 55 • ऋचा / मन्त्र 6

10.55.6

Mantra ID: 10.55.6

शाक्म॑ना शा॒को अ॑रु॒णः सु॑प॒र्ण आ यो म॒हः शूरः॑ स॒नादनी॑ळः । यच्चि॒केत॑ स॒त्यमित्तन्न मोघं॒ वसु॑ स्पा॒र्हमु॒त जेतो॒त दाता॑ ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.55.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

शक्तिसंपन्न व लाल रंग वाला एक पक्षी आ रहा है जो महान्‌, शूर, प्राचीन एवं बिना घोंसले वाला है. वह जो करना चाहता है, वह अवश्य सत्य होता है एवं कभी असफल नहीं होता. वह अभिलषणीय संपत्ति जीतता है एवं स्तोताओं को देता है. (६)

EN English Translation

A powerful and red-colored bird is coming which is great, brave, ancient and nestless. What he wants to do is definitely true and never fails. He conquers the identifiable property and gives it to the psalmists. (6)

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