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10.68.3
सा॒ध्व॒र्या अ॑ति॒थिनी॑रिषि॒राः स्पा॒र्हाः सु॒वर्णा॑ अनव॒द्यरू॑पाः । बृह॒स्पतिः॒ पर्व॑तेभ्यो वि॒तूर्या॒ निर्गा ऊ॑पे॒ यव॑मिव स्थि॒विभ्यः॑ ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.68.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अन्न की कुठिया से जिस प्रकार जौ बाहर निकाले जाते हैं, उसी प्रकार बृहस्पति ने कल्याणकारी दूध देने वाली, नित्य गमनशील, स्पृहणीय, शोभन वर्ण वाली और प्रशंसनीयरूप से युक्त गायों को पर्वत से बाहर निकाला. (३)
EN English Translation
Just as barley is taken out of the grain kernels, Jupiter pulled out of the mountain the cows that give welfare milk, the daily walker, the swellable, the adornment and the appreciably. (3)