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10.74.3
इ॒यमे॑षाम॒मृता॑नां॒ गीः स॒र्वता॑ता॒ ये कृ॒पण॑न्त॒ रत्न॑म् । धियं॑ च य॒ज्ञं च॒ साध॑न्त॒स्ते नो॑ धान्तु वस॒व्य१॒॑मसा॑मि ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.74.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
यह इन मरणरहित देवों की स्तुति है. वे यज्ञ में सभी प्रकार के रत्न देते हैं. देवगण स्तुति और यज्ञ को सिद्ध करते हुए हमें अधिक धन प्रदान करें. (३)
EN English Translation
It is the praise of these godless. They give all kinds of gemstones in the yajna. May the Devas give us more money while proving the praise and yajna. (3)