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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 86 • Mantra / Rik 16

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 16

10.86.16

Mantra ID: 10.86.16

न सेशे॒ यस्य॒ रम्ब॑तेऽन्त॒रा स॒क्थ्या॒३॒॑ कपृ॑त् । सेदी॑शे॒ यस्य॑ रोम॒शं नि॑षे॒दुषो॑ वि॒जृम्भ॑ते॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (१६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.86.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वह व्यक्ति मैथुन करने में समर्थ नहीं हो सकता जिसकी पुरुषेंद्रिय जांघों के बीच लटकती है. वह व्यक्ति मैथुन करने में समर्थ हो सकता है, जिसकी बालों से युक्त पुरुषेंद्रिय सोते समय विस्तृत होती है. इंद्र सबसे उत्तम हैं.” (१६)

EN English Translation

A person whose purulent organs hang between the thighs may not be able to have sex. The person may be able to have sex, whose hair-bearing purulent peritoneum expands while sleeping. Indra is the best." (16)

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