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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 86 • Mantra / Rik 17

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 17

10.86.17

Mantra ID: 10.86.17

न सेशे॒ यस्य॑ रोम॒शं नि॑षे॒दुषो॑ वि॒जृम्भ॑ते । सेदी॑शे॒ यस्य॒ रम्ब॑तेऽन्त॒रा स॒क्थ्या॒३॒॑ कपृ॒द्विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (१७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.86.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने कहा—“वह पुरुष मैथुन करने में समर्थ नहीं हो सकता जिसकी बालों वाली पुरुषेंद्रिय उसके सोते समय विस्तृत होती है, वही व्यक्ति मैथुन करने में समर्थ हो सकता है जिसकी पुरुषेंद्रिय जांघों के बीच में लटकती है. इंद्र सबसे श्रेष्ठ हैं.” (१७)

EN English Translation

Indra said, "A man whose hairy male senses are wide at the time of his sleep, the same person whose purulent organ hangs between the thighs may not be able to have sex." Indra is the best." (17)

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