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10.86.4
यमि॒मं त्वं वृ॒षाक॑पिं प्रि॒यमि॑न्द्राभि॒रक्ष॑सि । श्वा न्व॑स्य जम्भिष॒दपि॒ कर्णे॑ वराह॒युर्विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.86.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! जिस प्रिय वृषाकपि की तुम रक्षा करते हो उसके कान को कुत्ते की अभिलाषा करने वाला कुत्ता काटे. इंद्र सबसे श्रेष्ठ हैं. (४)
EN English Translation
O Indra! Cut off the ear of the beloved test of the one you protect the dog that you desire. Indra is the best. (4)