Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 88 • Mantra / Rik 17

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 88 • ऋचा / मन्त्र 17

10.88.17

Mantra ID: 10.88.17

यत्रा॒ वदे॑ते॒ अव॑रः॒ पर॑श्च यज्ञ॒न्योः॑ कत॒रो नौ॒ वि वे॑द । आ शे॑कु॒रित्स॑ध॒मादं॒ सखा॑यो॒ नक्ष॑न्त य॒ज्ञं क इ॒दं वि वो॑चत् ॥ (१७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.88.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस समय पार्थिव अग्नि और वायु परस्पर विवाद करते हैं कि हम यज्ञकर्म के नेताओं में यज्ञ को कौन अधिक जानता है, उस समय मित्र ऋत्विज्‌ यज्ञ करते हैं. वे यह निर्णय नहीं कर पाते कि कौन ठीक है? (१७)

EN English Translation

At the time when the earthly agni and the air dispute amongst us as to who among the leaders of the yajnakarma knows the yajna better, at that time the friends perform the ritwij yajna. They can't decide who's right. (17)

卐 HinduText AI