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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 90 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 90 • ऋचा / मन्त्र 6

10.90.6

Mantra ID: 10.90.6

यत्पुरु॑षेण ह॒विषा॑ दे॒वा य॒ज्ञमत॑न्वत । व॒स॒न्तो अ॑स्यासी॒दाज्यं॑ ग्री॒ष्म इ॒ध्मः श॒रद्ध॒विः ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.90.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब पुरुषरूप काल्पनिक हवि से देवों ने यज्ञ का विस्तार किया, उस समय वसंत ऋतु को घी, ग्रीष्म को काष्ठ तथा शरद्‌ ऋतु को हवि बनाया. (६)

EN English Translation

When the devas expanded the yajna with the purusha form of fantasy, at that time the spring became ghee, summer as wood and the autumn as havi. (6)

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