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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 92 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 92 • ऋचा / मन्त्र 11

10.92.11

Mantra ID: 10.92.11

ते हि द्यावा॑पृथि॒वी भूरि॑रेतसा॒ नरा॒शंस॒श्चतु॑रङ्गो य॒मोऽदि॑तिः । दे॒वस्त्वष्टा॑ द्रविणो॒दा ऋ॑भु॒क्षणः॒ प्र रो॑द॒सी म॒रुतो॒ विष्णु॑रर्हिरे ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.92.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

नराशंस नामक यज्ञ में स्तोताओं द्वारा अधिक जल वाली द्यावा-पृथिवी, यम, अदिति धन देने वाले त्वष्टा, ऋभुगण, रुद्र की पत्नी, मरुद्गण एवं विष्णु चार अंगों वाली अग्नियों के साथ पूजे जाते हैं. (११)

EN English Translation

In the yajna called Narasans, the stotas are worshipped by the stotas with high-watered Dyava-Prithivi, Yama, Aditi, the giving of wealth, the tvastha, the Ribhugana, rudra's wife, the marudgana and vishnu with four limbs of agni. (11)

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