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10.92.12
उ॒त स्य न॑ उ॒शिजा॑मुर्वि॒या क॒विरहिः॑ शृणोतु बु॒ध्न्यो॒३॒॑ हवी॑मनि । सूर्या॒मासा॑ वि॒चर॑न्ता दिवि॒क्षिता॑ धि॒या श॑मीनहुषी अ॒स्य बो॑धतम् ॥ (१२)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.92.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
बुद्धिमान् अहिर्बु्य हम कामना करने वाले ऋत्विजों की विशाल स्तुति को यज्ञ में सुनें. हे आकाश में निवास करने वाले एवं विचरण करने वाले सूर्य-चंद्र! तुम अपनी बुद्धि से इस स्तोत्र को जानो. हे द्यावा-पृथिवी! तुम स्तुति को अपनी बुद्धि से जानो. (१२)
EN English Translation
Let us listen to the great praise of the wise and willing ritvijs in the yajna. O sun and moon that dwell in the sky and move! You know this hymn by your wisdom. This is the earth! You know the praise by your wisdom. (12)