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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 92 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 92 • ऋचा / मन्त्र 13

10.92.13

Mantra ID: 10.92.13

प्र नः॑ पू॒षा च॒रथं॑ वि॒श्वदे॑व्यो॒ऽपां नपा॑दवतु वा॒युरि॒ष्टये॑ । आ॒त्मानं॒ वस्यो॑ अ॒भि वात॑मर्चत॒ तद॑श्विना सुहवा॒ याम॑नि श्रुतम् ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.92.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पूषा एवं सभी देवों के हितैषी तथा जल के नाती वायु हमारे गतिशील प्राणियों की यज्ञहेतु रक्षा करें. प्रशंसनीय अन्न पाने के लिए वायु की पूजा करो. हे शोभन आह्वान वाले अश्विनीकुमारो! तुम यज्ञ में जाते समय यह स्तोत्र सुनो. (१३)

EN English Translation

May the worship and the benefactors of all the gods and the grandson of water protect our moving beings. Worship the air to get praiseworthy food. O Shobhan invocation Ashwinikumaro! Listen to this hymn while you go to the yagna. (13)

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