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10.93.6
उ॒त नो॑ दे॒वाव॒श्विना॑ शु॒भस्पती॒ धाम॑भिर्मि॒त्रावरु॑णा उरुष्यताम् । म॒हः स रा॒य एष॒तेऽति॒ धन्वे॑व दुरि॒ता ॥ (६)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.93.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे कल्याण के स्वामी अश्विनीकुमारो! मित्र एवं वरुण! अपने तेज से हमारी रक्षा करें. इनके द्वारा रक्षित यजमान अधिक धन पाता है एवं मरुस्थल के समान विस्तृत पापों से बच जाता है. (६)
EN English Translation
O Swami Ashwinikumaro of Kalyan! Friends and Varun! Protect us from your speed. The host protected by them gets more wealth and escapes from the widespread sins like a desert. (6)