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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 95 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 95 • ऋचा / मन्त्र 10

10.95.10

Mantra ID: 10.95.10

वि॒द्युन्न या पत॑न्ती॒ दवि॑द्यो॒द्भर॑न्ती मे॒ अप्या॒ काम्या॑नि । जनि॑ष्टो अ॒पो नर्यः॒ सुजा॑तः॒ प्रोर्वशी॑ तिरत दी॒र्घमायुः॑ ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.95.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो उर्वशी आकाश से गिरने वाली बिजली के समान शुभ्र बनी तथा मेरी विस्तृत अभिलाषाओं को पूर्ण किया, उसके गर्भ से मानवहितकारी पुत्र उत्पन्न हुआ. उस समय उर्वशी ने मुझे दीर्घ आयु प्रदान की. (१०)

EN English Translation

Urvashi, who became as white as lightning falling from the sky and fulfilled my wide desires, gave birth to a man-giving son from her womb. At that time Urvashi gave me a long life. (10)

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