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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 95 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 95 • ऋचा / मन्त्र 9

10.95.9

Mantra ID: 10.95.9

यदा॑सु॒ मर्तो॑ अ॒मृता॑सु नि॒स्पृक्सं क्षो॒णीभिः॒ क्रतु॑भि॒र्न पृ॒ङ्क्ते । ता आ॒तयो॒ न त॒न्वः॑ शुम्भत॒ स्वा अश्वा॑सो॒ न क्री॒ळयो॒ दन्द॑शानाः ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.95.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब मानव पुरूरवा ने मरणरहित अप्सराओं को विशेषरूप से स्पर्श करते हुए वचन और कर्म से उनके साथ संपर्क स्थापित किया, तब वे क्रीड़ारत अश्वों के समान शब्द करके भाग गई और दिखाई नहीं दीं. (९)

EN English Translation

When manav Pururva established contact with them by word and deed, touching the undeadly nymphs in particular, they ran away with the same words as the playing horses and did not appear. (9)

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