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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 97 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 11

10.97.11

Mantra ID: 10.97.11

यदि॒मा वा॒जय॑न्न॒हमोष॑धी॒र्हस्त॑ आद॒धे । आ॒त्मा यक्ष्म॑स्य नश्यति पु॒रा जी॑व॒गृभो॑ यथा ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.97.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब मैं रोगी को शक्तिशाली बनाता हुआ इन ओषधियों को हाथ में लेता हूं, तब रोग की आत्मा उसी प्रकार न्ट होती है, जैसे मृत्यु से जीव नष्ट हो जाता है. (११)

EN English Translation

When I take these herbs in my hand, making the patient powerful, the soul of the disease is as it is that the organism is destroyed by death. (11)

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